Thursday, July 21, 2016

Lesson of Life अपना भरोसा

अपना भरोसा
राजगीर की पहाड़ियों में एक खरगोश रहता था. वो दिन भर इधर उधर दूभ चरता, पेट भरने के बाद दूसरे दोस्त जानवरों के साथ खेलता. कभी घोड़े की पीठ पर चढ़ जाता, कभी गधे को गुदगुदी कर देता, कभी गाय की पेट पर सो जाता, और रात में अपने बिल में घुस  जाता.
मजे में जीवन गुजर रहा था उसका.
एक दिन एक मोटा तगड़ा कुत्ता आया, उसकी नजर खरगोश पर पड़ी. वो खरगोश को खाने की फ़िराक में था. खरगोश डर के घोड़े के पास गया, बोल घोडा भाई तुम तेज भाग सकते हो तुम मुझे उस कुत्ते से बचाओ, वो मुझे काट खाएगा. घोडा बोल मैं तुम्हारे लिए उस कुत्ते से क्यों दुश्मनी लूँ. फिर वो गधे के पास गया, गधा बोला भैया उस कुत्ते को दुलत्ती मार के भगाओ, मुझे बचा लो, गधे ने भी मना कर दिया. फिर वो गाय के पास गया, बोला गाय बहन तुम अपनी सिन्घ से उस कुत्ते को मार कर उससे मुझे बचाओ. गाय बोली मैं भाग नहीं सकती वो कुत्ता मुझे परेशान करेगा.
सब जगह से हारकर खरगोश बैठा, कुत्ता उसकी तरफ फिर आ रहा था, खरगोश के पास अब कोई सहायता करने वाला नहीं था, वह बोला अब मुझे अपनी टांगों पर खुद भरोसा करना पड़ेगा, इतना कहकर वो जोर से भागा. 

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